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• ये म्याऊं नहीं करतीं

म्याऊं एफएम के बारे में रवीश के ब्लॉग पर पढ़ा था...दिल्ली में आने के बाद म्याऊं रेडियो से पाला भी पड़ा....बस में धक्के खाते...अचानक रेडियो म्याऊं ट्यून हो गया...महिलाएं म्याऊं म्याऊं करके बातिया रही थीं...हंसी हंसी के बीच महिलाओं का आत्मविश्नवास देखते ही बन रहा था...बोल्ड एंड इंटेलिजेन्ट....लगा की महिलाओं की यही बोल्डनेस रही तो एक दिन भौं भौं रेडियो पुरुषों का आत्मविश्वास पैदा करता सुनाई देगा...दरअसल ये महिलाओं की वो म्याऊं है...जो अमूमन दिल्ली के एअरकंडिशन घरों में बैठ कर दर्ज कराई जा रही है...ऐसी महिलाएं शायद अपने कारों के शीशों से बाहर देखना नहीं चाहतीं....दिल्ली जिन हाथों से खूबसूरत हो रही उनमें कई हाथ यूपी.. बिहार एमपी से आई महिला मजदूरों के हैं...ये महिलाएं रेडियो म्याऊं नहीं सुनती...वो केवल रेत में खेलते अपने बच्चों की तोतली जुबान को पहचानती हैं....ये महिलाएं फिट रहने या सुंदर दिखने के नुस्खे आपस में शेयर नहीं करतीं...इन्हें पुरुषों को सोफेस्टिकेटड तरीके से कोसना भी नहीं आता...ये गरियाती हैं...जमकर....आप इसे भले उनका गवांरुपन समझे...लेकिन ये उनका सहज गुस्सा है...अपने हक का गुस्सा...पुरुषों के साथ काम करके दो वक्त की रोटी खाने खिलाने के हेकड़ी का नतीजा...शायद तभी ये महिलाएं म्याऊं नहीं करती बल्कि दहाड़ती हैं...
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